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One day the govt of Bihar will definitely lose. One day India will reclaim its dignity and true democracy. Its perpetual face of being Vishwaguru will reestablish. TET teachers will get their deserving respect. Everything changes. Nothing is permanent.

बिहार सरकार द्वारा घोषित , नियोजित शिक्षकों के मूल वेतन में 15% की वृद्धि को लागू करवाने, ना कोई कोर्ट गया ,ना ही धरना दिया, क्योंकि चंदे की गुंजाइश नगण्य है और सभी शिक्षकों को फायदा है । किसी खास वर्ग को नहीं ।

जश्न-ए-महंगाई , केंद्रीय सरकार का सबसे बड़ा त्योहार।

शिक्षा मंत्रालय बिहार में पनौती का पोर्टफोलियो बनता जा रहा है।आदरणीय चौधरी साहब की विश्वसनीयता में लगातार अवनति हो रही है।आज उन्हें अपना ट्वीट डिलीट करने की नौबत आ गई।क्या शिक्षा मंत्री जी भी शिक्षक बहाली की पूर्णता को लेकर असमंजस में है? डिलीटेड ट्वीट से तो यही लगता है।

सबसे ज्यादा तनाव सेवानिवृत्ति के पश्चात् सबसे बड़ा सहारा पुरानी पेंशन व्यवस्था का स्थगन है। बिहार के अलपवेतनभोगी नियोजित शिक्षक जब सेवानिवृत्त होकर घर जाएंगे तो एक डिब्बे मिठाई के मोहताज होंगे। यही तनाव उन्हें अवसाद में धकेल रहा है।

😊😊आज का दिव्य ज्ञान😊😊 हुजूर, पर्व-त्यौहार में भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलना शर्मनाक और निंदनीय है।अपना वेतन-भत्ता तो आपलोग ससमय ले लेते हैं-दिव्यज्ञानी जी बड़े वाले बेवकूफ हैं आप।हम उन्हें पर्व के बाद पैसे देते हैं ताकि कम खर्च में आनंद उठाएं -मूर्खानंद बाबा।

स्वयं का हर लाभ और आर्थिक वृद्धि मेज़ थपथपा कर अगले महीने से ही ले लेती है; पर जब की बारी आती है तो मामला वित्त विभाग में फंस जाता है|

सरकार भी आपका,अखबार भी आपका,पत्रकार भी आपका,वितमंत्रालय भी आपका,शिक्षा मंत्री भी आपका तब देरी क्यों हो रही है। जब देना ही नहीं हैं तो सीधे बोल ना दीजिये नहीं देंगे साहब।

तोहफा तो इसे कहते है। सरकारी फाइल अटकी चुकी नियोजित वाली थी। तोहफा अभी ढंग से पैक नहीं हों सकी है। दिल दिया, ऐतबार की हद थी जान दी, तेरे प्यार की हद थी मर गए हम, खुली रही आंखें ये तेरे, इंतज़ार की हद थी 😭

कसमें वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या! 2020 के सितंबर में सरकार और हड़ताली शिक्षकों के बीच समझौता हुआ कि अप्रैल21 से अल्पवेतनभोगी नियोजित शिक्षकों के मूल वेतन में 15% की वृद्धि की जाएगी और यह संकल्प अगस्त 21 में वित्त विभाग को मंजूरी के लिए भेजा गया।अब क्या बचा है?

बिहार के लिए दुर्भाग्य है कि शिक्षा मंत्री अब प्रचार मंत्री बन गए है l शिक्षकों को वेतन मिले या न मिले लेकिन प्रचार मंत्री जी प्रचार जरूर कर देते है l

मा.मंत्री जी, कुशेश्वरस्थान और तारापुर विधानसभा उपचुनाव में जदयू की करारी हार को देखते हुए शिक्षक अभ्यर्थियों को लॉलीपॉप दिखा रहे हैं। नीतीश सरकार की दोगली नीति शिक्षक अभ्यर्थी समझ चुका है। अब नीतीश सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुका है।

वर्तमान में शिक्षा विभाग को देख रहे मंत्री जी शिक्षा विभाग के काम कम देखते है लेकिन सरकार की प्रचार मंत्री की भूमिका बखूबी निभाते है l शिक्षा एवं शिक्षक हीत में अब तक इनके द्वारा एक भी कार्य नही किया गया लेकिन प्रचार करने में महारत हासिल जरूर कर लिए है l

#15%_वेतन_वृद्धि देने की घोषण 1 अप्रैल को कर के ने लगभग4 लाख शिक्षकों को अप्रैल फूल बनाया ।

आपने भारत के इतिहास में कभी किसी विभाग में तीन चार महीने का वेतन बकाया रखकर , एक महीने के वेतन देने पर इतना प्रचार प्रसार देखा है ? शिक्षकों का तीन चार महीने का वेतन बकाया रख, एक महीने का वेतन देने के आदेश को सरकार उपलब्धि और बड़ा फैसला समझती है ।

शिक्षकों का नियोजन में लेटलतीफी, प्रशिक्षण में लेटलतीफी, 15% वृद्धि की घोषणा के बावजूद साल भर की लेटलतीफी, डी ए में वृद्धि, पर देने में लेटलतीफी, निर्धारित वेतन देने में लेटलतीफी....यह सब वंदनीय है । शिक्षक लेटलतीफ हैं इस पर गहरी नजर है माननीय की ।

मैं सहमत हूं। उन्हें जाना चाहिए था इसलिए वे चले गए। आखिरकार राजनेताओं का आर्थिक सशक्तिकरण होना चाहिए कि नहीं? बिहार में मुखिया और वार्ड कमिश्नर भी एक पंचवर्षीय के बाद साइकिल से स्कार्पियो पर चलने की हैसियत में आ जाते हैं।यह सब बिहार सरकार की ईमानदारी से ही संभव हो पाता है।

आम जन के लिए देश में लोकतंत्र है हितों की रक्षा के लिए सविंधान है चुनी हुई सरकार है फिर भी सारी नीतियां तो पूंजीपतियों के हक में बन रही हैं गरीबों की रेल प्राइवेट हो गई गरीबों के लिए बने अस्पतालों से सुविधाएं गायब है गरीबों के सरकारी स्कूल भी प्राइवेट होने जा रहे हैं बचा क्या

NPSऐसी भूलभुलैया है कि जिन कर्मचारियों को यह जबर्दस्ती दी जा रही हैं वही इसकी हकीकत को पूरी तरह नहीं जानते है इसमें Investment sureहै पर refund की कोई गांरटी नहीं है यह रोलेट एक्ट की तरह बिना वकील, बिना अपील और बिना दलील का कानून है

अत्यधिक शोध करने के बाद यह पता चला है कि यदि देश की बागडोर पूंजीपतियों के हाथ में दे दी जाए तो देश का कायाकल्प हो जाएगा क्योंकि पूंजी पतियों को गरीबों की मुंह का निवाला छीन कर रुपए बनाने का हुनर आता है